सामना

हुआ सामना खुदसे, तो मैख़ाने को चल दिया
शराब तो मिली वहां मगर साक़ी नही मिला
देखी जो सीरत अपनी जाम ए सिफ़ाल में
ज़माना तो मिला मुझमे मगर मैं बाकी नही मिला।
#शब्दाशीष

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कोई ग़म

कोई ग़म है मेरे दिल में
या मैं आशियां ए गम में रहने लगा हूँ,
सोहबते रिन्दा न जहां है
हाल ए दिल महफ़िल में वहां कहने लगा हूँ! #शब्दाशीष

मैंने देखे हैं

मैंने बहारें भी देखीं हैं
नज़ारे भी देखे हैं
अपनों के हाथों
ख़सारे भी देखे हैं
इस चाँद से कह दो
न इतराये खुदी पर
मैंने गर्दिश में अक्सर
सितारे भी देखे हैं।